Verse

Stringent warnings,
Rebellion longings…

Verse

हैरां हो क्यों जो अँधेरा है गर
खुश हूँ की चांदनी है डगर

 

 

– प्रिया सोनी

Verse

आज फिर खुद पे,
कुछ नवाज़िशें कर लें
इन उजालों को हटा,
चांदनी का सकून लें
एक तनहा सफर की
जो कहानियाँ दब सी गयी हैं,
आसमां से लिपट कर,
आज खुद से इकरार कर लें

 

– प्रिया सोनी

रंगभूमि

सही और गलत धर्म निरपेक्ष हैं,
पर हर किसी के लिए अलग हैं

एक सोच का समंदर है,
एक अनुभव की पतवार
निर्णय गर हो जो आगे बढ़ने का,
तो संग है उलटी बहती धार

मुसाफिर का सफर है,
मांझी पर है दारोमदार
दोनों ही को स्वामी होने का है गुमान,
पर दोनों की रंगभूमि अलग है

आसान नहीं किसी की मनोस्थिति आंकना,
सबकी वास्तविकता अलग है
सही और गलत धर्म निरपेक्ष हैं,
पर हर किसी के लिए अलग हैं ।

– प्रिया सोनी

Verse

कुछ पल जो याद रह गयें,
उन्हें संवारने का जी करता है,
गुज़र चुका है जो वक़्त,
उसे अब जीने का जी करता है ।

 
– प्रिया सोनी