Verse: Her

इक लौ जल रही थी,
इक आग बनके बहकी

इक चाह जो छुपी थी,
इक अर्ज़ बनके निकली

इक याद आज लौटी,
इक शब्द बनके चहकी

आसमां से लिपट कर,
इक रात जब वो रोई,
घनी निशा जो लगती थी वो,
अब होने लगी सुरमयी

इक आस अब है बाकी,
इक राह उसने ताकी,
तारों के संग वो गाती
दुनिया से है वो बागी ।

Priya Soni

Verse: मशहूर

यूँ ही नहीं मशहूर नज़रें इस अंजुमन में,
छुपा लें गर ये हाल-ए-वफ़ा,
तो हाल-ए-गिला भी इन्ही में समा है ।

शरारत झलकाती कभी ये ,
तो कभी आंसुओं को समेटे हुए है ।
कह दें राज़-ए-दिल कभी,
तो कभी छुप जाएं पलकों के साये में ये ।

यूँ ही नहीं मशहूर नज़रें इस अंजुमन में,
छुपा लें गर ये हाल-ए-वफ़ा,
तो हाल-ए-गिला भी इन्ही में समा है ।

– Priya Soni