कदम

हर जर्रे से निराश होकर ,
यूँ न मुड़ तू

इक तिनके भर आस संजो कर,
इक कदम आगे बढ़ा तू

मुश्किलात लाज़मी हैं यहाँ,
पर शिकायतें न कर तू
इच्छाशक्ति को प्रबल कर,
आंसुओं को समेट तू

इक तिनके भर आस संजो कर,
इक कदम आगे बढ़ा तू

– प्रिया सोनी

Advertisements