Verse: Life

अनायास ही उन्हें देखा, तो लगा के बहुत बदल गए हैं

आज कुछ पल ठहरे तो जाना, ज़िन्दगी की रफ़्तार बहुत तेज़ है ।

-Priya Soni

 

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अंतर्द्वंद

अंतर्द्वंद,
या उपापोह विचारों का
संयुक्त पर बिखरे से उन सवालों का,
जवाब जिनके खोजना चाहती हूँ,
अंतर्मन को टटोलना चाहती हूँ,
या किसी पुस्तक को ही खगोलना चाहती हूँ,
जहाँ विस्तृत वर्णन हो,
न केवल जवाबों का,
पर सवालों का भी

घर की इस खिड़की से देखती हूँ,
बाहर यही एक वृक्ष है
डाल से जुड़े कुछ पत्ते हैं,
जो चाहे जितना हवा के झोंके से लेहरालें,
पर वृक्ष से दूर जाने की उन्हें इज़ाज़त नहीं होती
यही से ही पल भर को,
देखते हैं गगन में उड़ते हुए,
उन पंछियों को,
कुछ ईर्ष्या से भरे मन को लिए,
अपनी इस विवशता से झुंझला से जाते हैं

कुछ ही देर में दिन ढलने को हुआ,
आसमान में एक लालिमा सी छा गयी,
वृक्ष भी जैसे उस वक़्त सुनहरा हो गया,
और पत्ते, की जैसे मोती चमक रहे हों

तभी पंछियों का जोड़ा भी अपने घोंसले में लौटा,
उदास मन से पत्तों ने पूछा,
“तुम्हे नहीं कोई विवशता,
लौट कर यहाँ आने की,
फिर क्यों नहीं उड़ जाते,
दूर कहीं फिर उसी गगन में”
पंछी इस बात को सुन मुस्काये,
जीवन में स्थिरता के महत् को समझाए,
“लुभावना है जो दूर से गगन,
नहीं है वहां घर सा वो सुकून,
यहीं इस वृक्ष से नाता है हमारा ,
तुम्हारे ही साथ बचपन पला है हमारा”
इस बात को सुन पत्ते भी मुस्काये,
एक मृग-तृष्णा से निकलकर, वो खिलखिलाये
और वृक्ष,
तो जैसे तृप्त हो आया,
अपने एक अभिन्न परिवार को था उसने पाया

ये अंतर्द्वंद,
या उपापोह विचारों का
संयुक्त पर बिखरे से उन सवालों का,
जवाब जिनके छुपे हैं,
इसी वृक्ष रुपी अंतर्मन में,
निकलकर स्वप्न रुपी मृग-तृष्णा से,
खोजती हूँ जवाब,
जीवन के आलिंगन में ||

_ Priya Soni

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The last wish…

Under the vast sky,
Eyes shimmering looking at the stars,
Lying on the green grass,
Breathing the scent of wet earth,

Resting my head on Mom’s lap,
Smiling at me,
Slowly she caressing my head,
And, singing me her favorite old melodies,
(She is a wonderful singer!)

Daddy sitting beside,
Talking about his old days of engineering,
(I love those old days college stories!)
Telling me how proud he is of me,
(I secretly hope it happens someday!)

Drinking together our favorite cup of tea,
Looking at that peaceful smile on their face,
Nothing more I want to see,
May be that’s how I want to die…

– Priya Soni

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My Childhood

When nothing seems to work out,
I look back,
And talk to my childhood

The eyes capable of dreaming to the infinity,
The heart with immense power to stand for the truth,
The soul with exquisite purity,
The attitude to conquer the world,
The same child is still inside me

Let the child breathe again,
Let the storm rage again,
The support I seek from the world,
Has to arise from within again…

– Priya Soni

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The Dream

Everyday, he burnt himself under the Sun,
Bathing in the sweat,
But not a sight of complaint

Buying a piece of bread,
For the children,
Was his only ambition

Today also,
He could manage only a piece,
Let’em have all of it”
He told to his wife
Earning man of the house,
Was again on the hunger strike
They’ve to study,
They need it more…”
Yearning for their growth,
He kept lying some more…

As the sun arrived again,
He was there on the fields,
Sparkling eyes had the same dream,
Though frailing health couldn’t support any more…

– Priya Soni

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