Verse: मशहूर

यूँ ही नहीं मशहूर नज़रें इस अंजुमन में,
छुपा लें गर ये हाल-ए-वफ़ा,
तो हाल-ए-गिला भी इन्ही में समा है ।

शरारत झलकाती कभी ये ,
तो कभी आंसुओं को समेटे हुए है ।
कह दें राज़-ए-दिल कभी,
तो कभी छुप जाएं पलकों के साये में ये ।

यूँ ही नहीं मशहूर नज़रें इस अंजुमन में,
छुपा लें गर ये हाल-ए-वफ़ा,
तो हाल-ए-गिला भी इन्ही में समा है ।

– Priya Soni

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कदम

हर जर्रे से निराश होकर ,
यूँ न मुड़ तू

इक तिनके भर आस संजो कर,
इक कदम आगे बढ़ा तू

मुश्किलात लाज़मी हैं यहाँ,
पर शिकायतें न कर तू
इच्छाशक्ति को प्रबल कर,
आंसुओं को समेट तू

इक तिनके भर आस संजो कर,
इक कदम आगे बढ़ा तू

– प्रिया सोनी