Verse

हैरां हो क्यों जो अँधेरा है गर
खुश हूँ की चांदनी है डगर

 

 

– प्रिया सोनी

Verse

Turbulence of thoughts,

Stirring numbing mind,

Penetrating bizarre words,

Amid musing lyrics…

Seizing actions,

Floating moments,

Silenced vocals,

Echoing minds…

 

– Priya Soni

Verse: मशहूर

यूँ ही नहीं मशहूर नज़रें इस अंजुमन में,
छुपा लें गर ये हाल-ए-वफ़ा,
तो हाल-ए-गिला भी इन्ही में समा है ।

शरारत झलकाती कभी ये ,
तो कभी आंसुओं को समेटे हुए है ।
कह दें राज़-ए-दिल कभी,
तो कभी छुप जाएं पलकों के साये में ये ।

यूँ ही नहीं मशहूर नज़रें इस अंजुमन में,
छुपा लें गर ये हाल-ए-वफ़ा,
तो हाल-ए-गिला भी इन्ही में समा है ।

– Priya Soni

Oblivion

Being oblivion of the society,
She asked for a little empathy…

Always wondered why they giggled,
Another stone through which she struggled…

Living amidst the people,
Those who never understood her pain…
With her help seeking eyes,
All prayers when went in vain…

When all her expectations died,
When hope didn’t want to rise,
Tired of being frown,
She wrote her heart down…

All grudges jumbled upon the page,
And, dancing words gave her a new hope,
Writing be her new friend,
Poems became the new acquaintances…
The societal given pain,
After all was not in vain…

Priya Soni

कदम

हर जर्रे से निराश होकर ,
यूँ न मुड़ तू

इक तिनके भर आस संजो कर,
इक कदम आगे बढ़ा तू

मुश्किलात लाज़मी हैं यहाँ,
पर शिकायतें न कर तू
इच्छाशक्ति को प्रबल कर,
आंसुओं को समेट तू

इक तिनके भर आस संजो कर,
इक कदम आगे बढ़ा तू

– प्रिया सोनी